का बरसा जब किसी सुखानी...कविता-
सुरेन्द्र पाल ग्राम-मवई, जिला-बाँधा, उत्तरप्रदेश से एक कविता सुना रहें है:
का बरसा जब किसी सुखानी-
समय चुप पुनिका पछतानी-
पर उप देश कुशल बहुत तेरे-
आजा रे हित नघ नरु नई-
का दर मन कहो एक आधार-
दे दिउ आलसी पुकारा-
हित अनहित पशु पक्षी ना जाना...(182171) GT
