मनुष जनम अनमोल रे...भजन-
सीजीनेट श्रोता नारायन एक भजन सुना रहे हैं:
मनुष जनम अनमोल रे-
मिट्टी में मत घोल रे-
अभी जो मिला है फिर न मिलेगा-
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं-
मतलब का संसार है-
किसी का नहीं एतबार है-
सोच समझ कर चलना रे भईया-
फूल नहीं अंगार है...(AR)
