कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-जस गीत...
ऋतिक ठाकुर ग्राम-मडपारा,नम्बर-वर्ड-03,जिला-दुर्ग (छत्तीसगढ़) से जस गीत सुना रहें है:
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर नैना-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर नैना-
नव दिन के तै पहुना बनके,नव दिन के तै पहुना बनके-
नव दिन के तै पहुना बनके,आजा वो नव रतिया माँ-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-
ककरो तै सहारा बने उऊ ककरो बने ज्योति-
ककरो बने अन के अस, ककरो बने तै बेटी-
ककरो घर मा टोला विराजे, ककरो मन के तीर-
कोनो हा तोला माटी माँ देखे कोनो हा मंदिर मा-
एही रदा माँ देखत देखत मन हा मोर जुडाथे-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-
कब आही वो बेरा ओ दाई तरसत हे मोर चोला-
नव दिन के तै पहुना बनके,नव दिन के तै पहुना बनके...
