रुक गया आंख से बैहता हुआ दरिया कैसे-गजल प्रस्तुत कर रहें है...
मारतांड सिंह इंद्राक्लास संगीत विश्वविद्यालय ग्राम-खैरागढ़ से गजल सुना रहा है,
रुक गया आंख से बैहता हुआ दरिया कैसे-
गम का तूफान तो बहोत तेज था ठहरा कैसे-
मुझको खुद पर भी भरोसा नहीं होने पाता-
लोग कह लेते गैरो पे भरोसा कैसे-
रुक गया आंख से बैहता हुआ दरिया कैसे-
हर घडी तेरे ख्यालो में खोया रहता हूँ-
मिलना चाहू तो मिलु खुद से तनाह कैसे-
गम का तूफान तो बहोत तेज था ठहरा कैसे-
