कल चांदनी रात थी...गज़ल-
दयासागर कुसवाहा एक गजल सुना रहे हैं:
कल चांदनी रात थी-
शब भर रहा चर्चा तेरा-
कुछ ने कहा ये चाँद है-
कुछ ने कहा चेहरा तेरा-
हम भी वहीं मौजूद थे-
हम से भी सब पूछा किये... (AR)
दयासागर कुसवाहा एक गजल सुना रहे हैं:
कल चांदनी रात थी-
शब भर रहा चर्चा तेरा-
कुछ ने कहा ये चाँद है-
कुछ ने कहा चेहरा तेरा-
हम भी वहीं मौजूद थे-
हम से भी सब पूछा किये... (AR)