ग्रामीण बुजुर्गों के द्वारा पारम्परिक तरीके से डोरी (रस्सी) बनाने का काम घर बैठे करते हैं...

ग्राम पंचायत-जामगाँव की आश्रित गाँव डोंगरीपारा ब्लाक-बस्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से बाबूलाल नेटी और उनके साथ हैं ग्रामीण बुजुर्ग दादा फगनू राम कवासी राम परंपरागत रूढ़िवादी संस्कृतियों के अनुसार से डोरी (रस्सी) इसको गोंडी में काटा जीरा बोलते हैं, जिसे ग्रामीण बुजुर्ग लोग घर में बैठकर इस काम को अच्छे करते हैं, इसका उपयोग घर गाय-बैलों को बाँधने के लिए काम आता है और यह लगभग दो से तीन साल तक काम आता हैं| RK

Posted on: Sep 20, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER