दुनिया गोल है : एक कविता
लोग कहते हैं कि दुनिया गोल है
लेकिन मैं कहता हूं कि दुनिया नहीं दुनिया के लोग गोल हैं
कोई किसी का शांति अमन को लेकर गोल है
कोई किसी का मनी रकम को लेकर गोल है
कहीं लडका लडकी को लेकर गोल है
कभी कभी तो अपने मोहल्ले की लाइन भी गोल है
तो मेरे भले साथी, अब भी दिन है सुधर जाओ
इस गोल होने से बाज आओ
क्योंकि हर एक की ज़ुबां पर इस बात की तौल है
कि एक न एक दिन इस दुनिया से हम सब की लाइन गोल है
