दुष्ट अपना स्वभाव नहीं छोड़ता इसलिये उसका साथ नहीं देना चाहिये...
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक लघुकथा सुना रहे हैं:
एक राजा था उसके पलंग में बहुत से खटमल रहते थे जो राजा का खून पीकर जीवित रहते थे, एक दिन के एक मच्छर खटमल से बोला भाई तुम और तुम्हारा परिवार बड़े मजे से राजा का खून पीकर जी रहे हो, मुझे भी खून पीने दो| खटमल बोला मै चुपचाप खून पीता हूँ और तुम डंक मारते हो इससे राजा जाग जायेगा, तुम तो भाग जावोगे लेकिन हम मारे जायेंगे| मच्छर के बार बार कहने पर खटमल मान गया जिसके बाद मच्छर के डंक मारने से राजा जाग गया| मच्छर तो भाग गया लेकिन सारे खटमल मारे गये| कहानी से सीख मिलती है जो हमें फसा दे उसे साथ नहीं देना चाहिये|
