तोरा मन दर्पण कहलाये...गीत-
राम प्रसाद ग्राम-केरा,जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ़) से एक गीत सुना रहे हैं-
तोरा मन दर्पण कहलाये-
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये-
तोरा मन दर्पण कहलाये-
मन ही देवता, मन ही ईश्वर-
मन से बड़ा न कोय-
मन उजियारा जब जब फैले
जग उजियारा होय-
इस उजले दर्पण पे प्राणी-
धूल न जमने पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये-
