जो हिंसाए होती है, उनको समाज के सामने लाकर चर्चा करने चाहिए, तब हिंसा ख़तम हो सकती है...
ब्लाक-सिरमौर, जिला-रीवा मध्यप्रदेश से नीलू डेहरिया बस्तर मांगे हिंसा से आजादी को लेकर अपनी राय व्यक्त कर रही है, उनका कहना है कि समस्या को राजनैतिक सत्यदा किया जाता है और ऐसी हिंसाए सबसे ज्यादा जंगल में रहने वाले आदिवासी लोग प्रभावित होते है | इस तरह के मामलो में राजनीति भी इन्वोल्व होती है और वहां के नागरिक होते है उनको भूमि पट्टा नहीं देते है और उनके साथ कहीं न कहीं हिंसा करते है | और उनको नक्सली बोलकर मार देते है | इन सब चीजो को लेकर चर्चा होना चाहिए | ये सभी चीजे समाज के सामने उबरकर आनी चाहिए तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है |
