मैं खामोश बस्तर हूं, लेकिन आज मैं बोल रहा हूं...
मैं आज़ादी के लिए गुण्डाधुर को जन्म दिया था
इन्द्रावती का पानी तो भगवान राम ने जिया था
भोले आदिवासी भाला और धनुष बाण चलाते थे
विदेशी हथियार तो उनकी समझ में नहीं आते थे
ये विकास की कैसी रेखा खिंच गई
मेरे साथी मैं ही लैंडमाइन बिछ गई
लाशों के टुकडे जोड रहा हूं
एक एक जख्म खोल रहा हूं
मैं खामोश बस्तर हूं
लेकिन आज मैं बोल रहा हूं
मंगल कुंजाम
