भरोसे का फायदा उठाना - बगुले, गिध्द और बिल्ली की कहानी...
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व एक कहानी बता रहा है, एक पेड़ पर एक बगुला आपने बच्चो के साथ रह रहा था बच्चे बहुत छोटे थे उड़ नही पाते थे इस लिए वे घोसला में ही रहते थे| बगुला उनके लिए छोटी मछलिया ले आता था जिनसे वे उनकी भूक मिटाया करते थे एक समय की बात है की एक गिध्द आया और उनसे निवेदन किया की मै परिवार में आकेला हो गया हूँ| की मेरे परिवार में कोई भी सदस्य नही बचा है मुझे अपने परिवार में शरण देदो मै आपके बच्चो को देख भाल करूँगा उन्हें ज्ञान बाते बताऊंगा कहानी किस्से सुनाऊंगा, तो बगुले ने कहा तुम गिध्द हो तुम मेरे बच्चो को मार डालोगे तो गिध्द ने कह तुम मुझ पर भरोसा रखों मै तुम्हारे बच्चो के साथ कोई अन्याय नही करूंगा गिध्द बार बार निवेदन किया जिसके पश्चात् बगुला को विश्वास हो गया| उसने गिध्द अपने घर में जगह दे दी अब बगुला चला जाता था बाहर और बच्चे गिध्द के साथ रहने लगे जो गिध्द को दादा कहने लगे और गिध्द कहानी किस्से सुनाया करते थे फिर इस तरह समय गुजरने लगा एक बार बिल्ली आया और बगुले के बच्चे को खाना चाहता था लेकिन सोच रहा था कि कैसे खाऊ यहाँ तो गिध्द है| कोई उपाय करना होगा चलाकी करनी होगी गिध्द बिल्ली के पास गया गिध्द घुस्से से बोला क्यों आये हो यह पर चलो निकलो यह से तो बिल्ली ने कहा की मैंने मास मछली खाना छोड़ दिया हैं क्योकि अब मनुष्य जन्म जो पाना है| तुम मुझ पर भरोसा रखो मै बच्चों को कुछ नही करूँगा मै भी बच्चों को ज्ञान की दो बाते सुना लिया करूंगा तो गिध्द को भरोसा हो गया और बिल्ली भी बैठ गया वही पर ज्ञान की बात सुनाते-सुनाते गिध्द को नींद आ गयी भरोसे का फायदा उठाकर बिल्ली ने बगुले के सारे बच्चे खा गया और लापता हो गया| इतने में बगुला आया देखता है अरे मेरे बच्चें कहा है उसी दौरान गिध्द गहरी नींद से उठा और वह भी धकमका गया तो बगुले ने गिध्द को बोला कि तुमने मेरे बच्चों को मार डाला..
