मै पतझड़ की एक काली, तुम चाहो तो खिल जाऊं...कविता-
महकापाल, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से पूनम और कुमे एक कविता सुना रहे हैं:
मै पतझड़ की एक काली, तुम चाहो तो खिल जाऊं-
पर एसी मेरी चाह नहीं, माली में घुस जाऊं-
एक यही अभिलाषा मै सबको गले लगाऊं-
इन नन्ही नन्ही कलियों संग मै झूम झूम कर गाऊं-
उठ निकल प्यार की बाधा पर सुंदर राग सुनाऊं-
मै पतझड़ की एक काली, तुम चाहो तो खिल जाऊं-
पर एसी मेरी चाह नहीं, माली में घुस जाऊं...
