बेटियां शीतल हवाएं हैं...एक कविता
बेटियाँ शीतल हवाएं हैं ,
जो पिता के घर बहुत समय
तक नहीं रहतीं ......
ए तरल जल की पराते हैं ,
लाज की उजली कनाते हैं !!
बेटियां वो प्रजाएँ हैं जो दिल की बात कभी खुल कर
नहीं कहती हैं ...
कुछ दिन इस पार है,
बेटियां ऐसी घटायें है,
जो छलकती है नदी बनकर
बेटियाँ शीतल हवाएं हैं ,
जो पिता के घर बहुत समय
तक नहीं रहतीं ......
