तेवकले मनवानी बूझे, मनवा है बरे अनजान...गीत-

बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से संध्या खलखो एक गीत सुना रही हैं :
मनवा कर पाप लागे, प्रभु ये सुहाना है रे-
तेवकले मनवानी बूझे, मनवा है बरे अनजान-
अंधा के आंख देले, लंगड़ा के पाँव हो-
अंधा के आंख देले, बहिरा के कान हो-
गूंगा के बोली देले, मुर्दा के जीवन हो-
रोगी के चंगा करले, मुर्दा के जीवन हो-
तेवकले मनवानी बूझे, मनवा है बरे अनजान...

Posted on: Dec 13, 2019. Tags: BALRAMPUR CG SANDHYA KHALKHO SONG VICTIMS REGISTER