फुलों सी वो नाजुक है, वदन उसका रुई सामान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
फुलों सी वो नाजुक है,
वदन उसका रुई सामान,
फिर भी ऊँचे पर्वत को चढ़ जाती,
वो नन्ही सी जान,
पर्वतो से टकरा कर, अपना वो बिल बनाती,
फुर्ती रहती हरदम, कहाँ कहाँ क्या मीठा...
