चाउर ला छरत रहें, लचक गईस मोर कूला...हास्य रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
चाउर ला छरत रहें, लचक गईस मोर कूला-
लकरी ला फोरत रही, मारिस मोर दूल्हा-
मंद ला पी के आईस, मारिस मोर दूल्हा-
ओकर मार देख के भूल गये अपन कूल्हा-
जल्दी-जल्दी गोड ला बढ़ायें लेहे बर गये हें पानी-
आवत रहे बिछल के गिर गये, छिला गये कोहनी छाली...
