चक्की लोट रही थी, खड़ी कील के संग...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
चक्की लोट रही थी, खड़ी कील के संग-
खुटी घुमा रही थी चक्की के संग-संग-
गेहूं पीस रहा था, चक्की कील खूटी के संग-
हुई धुनाई खूब पिसाई, बना गेहूं से वह आटा-
भीगी खूब मसलाई, खाया खूब वह चाटा-
बेलन आई खूब बेली बन गई घी संग पराठा...
