आया ग्रीष्म तपी सूरज, पसीना बनकर बहेगी...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
आया ग्रीष्म तपी सूरज, पसीना बनकर बहेगी-
तपन ऐसा हुआ कि उमसने लगा शरीर-
छांव भी काटने लगा मन को किया घायल-
थक हार कर बैठ गया-
विश्व की सुन बजती पायल...
