बेटी घर की शान, बेटी घर की आन...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
बेटी घर की शान, बेटी घर की आन-
बेटी नहीं कोई सामान, बेटी को दो समुचित ज्ञान-
बेटी जब पढ़ेगी देश राष्ट्र गढ़ेगी-
एक नहीं राष्ट्र गढ़ेगी, इस देश का होगा नाम-
जिस देश में बेटी को हो शिक्षा-
उस देश का बढ़ता मान सम्मान...
