हांथी आये थपक थप, पूंछी ला सपटाय के...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास पोया एक कविता सुना रहे हैं :
हांथी आये थपक थप, पूंछी ला सपटाय के-
पानी खीचे सोंढ में, आंखी ला मटकाय के-
सूपा जैसे कान हवे, देखे सीधे जाय के-
बार बोकला खाथे येहर, गेडा ला चटकाय के-
चर-चर महूत करथे, अंकुस ला गड़ाय के-
हमन ला घुमाय पीठ मा बैठाय के...
