किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये...कहानी-
हिरन और सियार दोनों मित्र थे| दोनों एक सांथ कुएं पर पानी पीने के लिये जाते थे| दोनों एक दूसरे को सहारा देते हुवे पानी पीते हैं लेकिन सियार के मन में खोट होने के कारण वह हिरन को कुए में गिरा देता है| जिससे हिरन मर जाता है| उसी समय सियार आवाज लगता है जो हिरन को निकलेगा वो हिरन का सारा मांस खायेगा| वहीँ पास में कुछ किसान काम कर रहे होते हैं, वो आवाज को सुनकर आ जाते हैं| और हिरन को कुए से बाहर निकलकर उसका मॉस आपस में बाटने लगते हैं| तभी सियार अपना हिस्सा लेने आता है| तब किसान पूछते हैं| तुम यहां क्या कर रहे हो| हमने मेहनत से इसे निकला इस पर हमारा हक है| सियार ने कहा ठीक है| थोड़ा आग दे दो| किसानो उसे आग दिया और सियार ने उसे खेत में फेक दिया | किसानो के फसल जानने लगे तो सभी आग बुझाने के लिये भागे और सियार ने सारा मांस खा लिया | इस कहानी से सीख मिलती है कि किसी के बहकावे में न आकार सोच समझकर काम करना चाहिये|
