अगहन कातिक परे पला, अऊ जेठ बैसाख करे कला...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं:
अगहन कातिक परे पला, अऊ जेठ बैसाख करे कला-
सांथी जंगल झाड़ होये उजाला-
अऊ गढ़ा, नदी सूखे नाला-
जंगल झाड़ होय ई उजराला-
पानी बिना पवन अऊ पवन बिना धान-
जल बिन मछली पवन बिन धान...
