राह लंबी हो गई या राही सक्षम नहीं, जाना था उस पार, पर यहीं का यहीं रह गये...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
राह लंबी हो गई या राही सक्षम नहीं-
जाना था उस पार, पर यहीं का यहीं रह गये-
छू लेना था असमान पर कद नाटे हो गये-
चीज यहां की चका चौंद उसी भवर में फस गये-
राह लंबी हो गई या राही सक्षम नहीं-
जाना था उस पार, पर यहीं का यहीं रह गये...
