हमे भाषा सीखने के लिए कोई स्कूल की जरुरत नहीं होती, आपस में मित्रता बनाकर सीख सकते हैं...
ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उतर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव के साथ गाँव के साथी प्रभु पद्दा जुड़े है, वे भाषाओ पर आपस में चर्चा कर रहे हैं प्रभु पद्दा गोंडी में बता रहे हैं कि चार भाषा जानते हैं प्रभु पद्दा किसी बंगला स्कूल में नहीं पढ़े हैं, गोरमेन्ट स्कूल में बंगाली के बच्चे आते थे|उन लोगों के साथ मित्रता बनाकर बंगाली भाषा सीखा हैं,और प्रभु पद्दा एक ही व्यक्ति था माडिया जाति से बाकि पूरे गोरमेन्ट स्कूल में बंगाली और छत्तीसगढ़िया लोग पढ़ते थे |प्रभु पद्दा ने वहीँ से बंगाली भाषा, छत्तीसगढ़िया भाषा, हिंदी भाषा सीखा हैं | तब से वे चार भाषा जानते हैं,इस प्रकार हमे भाषा सीखने के लिए किसी स्कूल की जरुरत नहीं होती है, आपस में मित्रता बनाने से भी सीख सकते है|
