पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम...जीवन कथा
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक हकीकत कथा सुना रहे हैं: पुनरपि जन्म पुनरपि मरणम, ये काया विनाशनम: जैसे सृष्टि में चार ऋतु होते हैं शरद, बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, ठीक उसी प्रकार जीवों की भी चार अवस्था होती है, बचपन, लड़कपन, जवानी, बुढ़ापा, लेकिन ये चक्र तब तक चलती है जब तक सृष्टि है.मनुष्य और जीव जंतु की आयु सीमा समाप्त हो जाती है और वह एक दिन मृत्यु को प्राप्त हो जाती है यहां जो भी जीव आता है ये शरीर छोड़कर जीवात्मा उड़ जाता है| जितना दिन भटकने का रहता है उतना दिन भटकने के बाद पुनः इस धरती में जन्म लेता है और कर्म के अनुसार दुःख-सुख को काटने के बाद पुनः उन्ही चार अवस्था में वापस हो जाता है...
कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.
