चाह नही मै सुरबाला के गहनों में गूथा जाऊं...कविता-
ग्राम-बुकमा, पंचायत-रामपुर, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से अफीका नगेसिया माखनलाल चतुर्वेदी की एक कविता सुना रही हैं :
चाह नही मै सुर बाला के गहनों में गूथा था जाऊं-
चाह नही मै प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं-
चाह नही सम्राटो के सर पर हे हरी डाला जाऊं-
चाह नही देवो के सिर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊ-
मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर तुम देना फेक-
जिस पथ पर जाएं वीर अनेक...
