जरो बिन सारे की नदियाँ हो...बघेली लोकगीत
ग्राम+पोस्ट-उलहीखुर्द, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश गुप्ता एक बघेली लोकगीत सुना रहे है:
जरो बिन सारे की नदियाँ हो
मोरो महुआ उजड़ गव-
महुआ उजड़ गव मोरो-
महुआ उजड़ गव-
सास मोरे घर मा ससुर मोरे घर मा-
जरो बिन सारे की नदियाँ हो...
