Kaisa ho School hamara : A poem of Girish Tiwari
Girish Tiwari Girda a poet from Uttarakhand has recently passed away. Adiyog has sent this poem in his honor called How should be our school? The poem was used in many peoples movements demanding better education for children
कैसा हो स्कूल हमारा ?
जहां अंक सच सच बतलायें, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां प्रश्न हल तक पहुंचायें, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न हो झूठ का दिखव्वा, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न सूट-बूट का हव्वा, ऐसा हो स्कूल हमारा
कैसा हो स्कूल हमारा ?
जहां किताबें निर्भय बोलें, ऐसा हो स्कूल हमारा
मन के पन्ने-पन्ने खोलें, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न कोई बात छुपाये, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां न कोई दर्द दुखाये, ऐसा हो स्कूल हमारा
कैसा हो स्कूल हमारा ?
जहां न मन में मनमुटाव हो
जहां न चेहरों में तनाव हो
जहां न आंखों में दुराव हो
जहां न कोई भेदभाव हो
जहां फूल स्वाभाविक महके, ऐसा हो स्कूल हमारा
जहां बालपन जी भर चहके, ऐसा हो स्कूल हमारा
