हर गली हर चौराहा ख़ुद से पूछता है, क्या तुम्हारे मुल्क में भी मजदूर बिकता है...कविता
जिला-कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के.एम भाई मजदूर दिवस पर एक कविता सुना रहे है:
हर गली हर चौराहा ख़ुद से पूछता है-
क्या तुम्हारे मुल्क में भी मजदूर बिकता है-
तुम्हारे मुल्क में रोटी इतनी सस्ती क्यों,
कि थाली का जूठन हमारे पेट का निवाला बनता है-
साहब और मजदूर का भी ये कैसा अटूट रिश्ता है-
कि महलों के बीच हमारा बच्चा भूखा मरता है-
हर गली हर चौराहा ख़ुद से पूछता है...
