कोयला के खातिर जाहि प्राण, कोयला ले निकाले के खातिर सरकार के हवे प्लान...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रहे है:
कोयला के खातिर जाहि प्राण, कोयला ले निकाले के खातिर सरकार के हवे प्लान-
रेलवे लाईन बिछावत हवे, किसान मन के लूट के भूईय्या कंपनी मन के मितान हवे-
कहा पाओं खेतिहर भूईय्या, झाड़ जंगल ल घलो करवावत हवे सफ़ाया-
नदी नरवा के पानी उखरेज खातिर, उमा नहीं है कौनो सुनैय्या-
कहां जाबो कहां रहिबो, करवावत हवे जन सुनवाई-
करवा के हमन किसान मन कार्यवाहीं, देखों भाई हमर सरकार ल कम्पनी की
करत है हवे भलाई...
