दाई है मन मन में हासत है, दादा हर फेटफेटी ला उतारत है...छत्तीसगढ़ी कविता
तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
दाई है मन मन में हासत है, दादा हर फेटफेटी ला उतारत है-
दाई ला कहत है कर झट कोन, ये देख के बैला हरजावत है-
झट कुन जाबों तो झट कुन आबों, आते घरवा ला बैला ला घलो देखबो-
लोग लईका मन नानचुन, नानचुन हवे, उमन खात है संझा के झट कुन-
दादा के गोट ला सुनके दाई ह, खड़बढ़, सड़बढ़ बेनी मा बांध जात है रबर-
फेटफेटी में बैठ के दुनो कोई कैसन जावत है, देख तो बकाइ पहुँच गयें रायगढ़ शहर...
