दुःख अँधेरी रातो में, जगमगाती हंसमुख तारों के बीच...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
दुःख अँधेरी रातो में-
जगमगाती हसमुख तारों के बीच-
कोई चिराग ढूँढता हूँ-
पर मिलता नहीं कोई ऐसा चिराग-
मुझे तो दिखता है होता हुआ-
बर्बादी कैसा होगा हमारा भविष्य...
