मोबाइल पर एक कविता
वाह रे मोबाइल, तोर आवाज़ ले दिल दहल जाथे
कछु करत रहा तबहू ले झट से हाथ में उठा लेथे
अधिकारी के कोल होए तो हाथ फडफडाए जाथे
प्रेमिका के काल होए तो दिल खुश हों जाथे
घरवाली के काल होए तो दिमाग खराब हों जाथे
बेटा के काल होए तो जेब में हाथ उतर जाथे
बेटी के काल होए तो डर पहले समा जाथे
रिश्तेदार के काल होए तो दिल समा जाथे
फायदे के लिए काल होथे तो नेटवर्क बिजी बताथे
मिस्ड काल आथे तो दिल घबरा जाथे
घर परिवार मा गोठीयाए बर पैसा पूरा जाथे
हाय हैलो करे बर नशा जैसा लगथे
चिट्ठी पत्रिका भेजे बर अबड लेट लागे
लिखने के बाद हफ्ता बीत जावे
चिट्ठी पतरी लिखे को हों गए ज़माना
रोज़गार गारंटी में १२० रू हों जाए रोजी
कम से कम २० रू मोबाइल चार्ज कराना
रेडियो टेप से गीत सुने के रहिस एक ज़माना
अभी मोबाइल पर मधुर गीत सुने के हे ज़माना
विष्णु देव
