चिड़िया बैठी प्रेम प्रीत की, रीति हमें सिखलाती है...कविता
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक कविता सुना रहे है:
चिड़िया बैठी प्रेम प्रीत की, रीति हमें सिखलाती है-
वह जग के बन्दी मानव को, मुक्ति मन्त्र बतलाती है-
वन में जितने पक्षी है, खंजन कपोत चातको की-
साख हंस आदिवास, करते सब आपस में हिलमिल-
उनके मन में लोभ नही, पाप नहीं परवाह नही-
जग का सारा माल हड़पकर, जीने को भी चाह नही-
जो मिलता है अपने श्रम से, उतना भर लेते है-
बच जाता है औरो के हित, उसे छोड़ देते है...
