संगवारी रे कैसे बचाबो परान...वन गीत
ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं :
संगवारी रे कैसे बचाबो परान – जंगल के बिना पानी नई बरसही – जंगल के बिना बरसा नई होही – कहां पाबो कुटकी धान भईया गा – जंगल मा मिलथे पूटू और पिहरी सब्जी गजब मिठाथे गा भईया – जंगल के तेंदू भेलवा खाए ले पाचन शक्ति बढाते गा भईया – जंगल ला झिन काटो गा भईया...
