पीछू बिछड़ गए साल, पीछू बिछड़ गए सारे संगी...नववर्ष पर कविता -
भोरमदेव वनांचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू नववर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे हैं:
पीछू बिछड़ गए साल पीछू बिछड़ गए सारे संगी-
मोला जन करबो याद नावा रंग में नावा साल-
दो हजार अठारह के संगड़ हो विकास-
हमर ऐसे सरकार बनाओ कि जनता हित में करिह काम-
जनता के सुनय और जागय जन करें परेशान...
