नवा साल आवत है, बोकरा मुर्गी मन घबरावत है...कविता -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया नये साल के उपलक्ष्य में एक कविता सुना रहे है:
नवा साल आवत है-
बोकरा मुर्गी मन घबरावत है-
का होई हमार जीवन हर पानी-
भीतर मछली मन डरावत है-
नाचते गाते डीजे बजाते-
आउर दारु के नदियाँ बहाते-
देख के तमाशा ला-
मुश्वा गला घबरात है..
