सीटी की तर्ज में सरगुजिहा गीत...होली है -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया आज सीटी की तर्ज में एक सरगुजिहा फागुन गीत सुना रहे है: होली है...कैलाश पाया गाय चराते हैं होली आने में तो अभी देर है पर गाय चराते चराते जब भी उनको खाली समय मिलता है वे सीजीनेट के श्रोताओं के साथ अपने गीत, अपनी बांसुरी की धुन और आज सीटी से फागुन गीत सुना रहे हैं. वे पढ़े लिखे नहीं हैं, बचपन में उनको स्कूल जाने का मौक़ा नहीं मिला पर वे कहते हैं कि उनको भगवान का दिया कम्प्युटर बहुत तेज है. वे अपने ही दिमाग में कविता और गीत की रचना करते हैं धुन कहीं से सुनते हैं या खुद भी बनाते हैं और अपने मोबाइल फोन से गाय चराते चराते इन गीत, कविता और कभी बांसुरी और सीटी की धुनों को हम सभी को सुनाते हैं. वे बहुत सी समस्याएँ भी हल कर लेते हैं...
