जब भीषण गर्मी की तपन जलाई थी अंग...गीत -
डिंडोरी मध्यप्रदेश से संतोष अहिरवार साल के समापन पर एक गीत सुना रहे हैं :
जब भीषण गर्मी कि तपन जलाई थी अंग – तब पावस आ गया भर बौछार उमंग
बौचार में भीगकर कपड़े होते तंग – गोरे सिमटे लाज में दिखता है हर अंग – खुद पर ही मर मिटी लाल हो गया रंग – लाजवंती सी सिमटी चाहत पीका संग – वे तो हैं परदेश में कैसे धरे धीर...
