दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान...श्लोक -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता रामायण का श्लोक सुना रहे हैं :
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान-
तुलसी दया न छांडिये जब तक घट में प्राण-
माया मरी न मन मारा मर मर गया शरीर-
आशा तृष्णा न मरी कह गए दास कबीर-
बड़ा हुवा सो क्या हुवा जैसे पेड़ खजूर-
पंछी को छाया नही फल लागे अति दूर...
