सेवा जोहार भूल गए आदिवासी रे रीति रिवाज...आदिवासी गीत -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे है:
सेवा जोहार भूल गए आदिवासी रे रीति रिवाज-
माता पिता के जोहार छोड़े रीति रिवाज-
दूसरे के रीति अपनाए आदिवासी रे-
भूल गए रीति के रिवाज-
सेवा जोहार भूल गए आदिवासी रे रीति रिवाज...
