आदिवासी गाँव की कहानी: खेत से सालभर का भोजन नहीं होता, दुकान से 50रू दिन कमाता हूँ...
सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम पंचायत-बालूद, कोसापारा जिला-दन्तेवाडा (छतीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी गाँव के निवासी भुमडा गावड़े के सांथ में बात कर रहे हैं ये अपने जीवनशैली के बारे में बता रहे हैं कि वे एक गरीब परिवार से है उम्र 35 वर्ष है, उनके घर में सात सदस्य हैं जिसमे दादी,चार बच्चे, एक बहन और स्वयं शामिल हैं. ये एक टूटे हुवे घर में रहते हैं, अपने जीवन यापन के लिए एक दुकान चलाते है जिसमे लगभग 50 रूपए प्रति दिन कमाते है साथ ही खेती भी खेती करते हैं जिसमे डेढ़ क्विंटल की फसल उगाते है जिससे साल भर का भोजन नहीं हो पाता। बच्चे सरकारी हॉस्टल में रहकर पढ़ रहे हैं पर उनके लिए पैसे जुटाना अक्सर मुश्किल हो जाता है. भुमडा गावड़े@7587836397.

