मन सम्पत्ति, तन सम्पत्ति और यह जीवन सम्पत्ति...देशभक्ति कविता -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे है :
मन सम्पत्ति, तन सम्पत्ति-
और यह जीवन सम्पत्ति-
चाहता हू देस की धरती मुझे-
कुछ और भी दू-
माँ तुम्हारा, ऋण बहुत है-
मै इतना कर रहा फिर भी निवेदन-
थाल में लाऊ, सजाकर भाल जब-
कर दया सभी कर लेना प्रण-
गाना अर्पित, प्राण अर्पित-
रक्त का कण कण अर्पित...
