कोई नही पराए मेरे, घर सारा संसार है...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया कविता सुना रहे है :
कोई नही पराए मेरे घर सारा संसार है-
मै न बंधा हूँ, सालों जंग लगी जंजीर में-
मै न खड़ा हूँ, जात पात की ऊँची-ऊँची भीड़ में-
मेरा धर्म न कुछ, सयानी शब्दों का सिर्फ गुलाम है-
मै बस कहता हूँ कि, प्यार है तो घट घट में राम है-
मुझसे तुम न कहो, मंदिर मस्जिद-
कोई नही पराए मेरे घर सारा संसार है...
