निन्यानवे का चक्कर...कहानी -
बालाघाट, (मध्यप्रदेश) से सरला श्रीवास ९९ के चक्कर की कहानी सुना रही है, जाड़ा के दिन थे ओंस पड़नी कम हो गई थी, महुआ के सुन्दर-सुन्दर पीले फूल टपकने लगे, ममता और कलावती महुए के फूल बीनने लगी और दुकान में बेचने लगी, ममता महुआ से मिले पैसे को फालतू खर्च करने लगी, कलावती फिजूलखर्च नही करती थी, एक दिन ममता ने कलावती से कहा तुम मुझसे अधिक महुआ संग्रह करती हो और खर्च नही करती हो, तब कलावती ने कहा मैं 99 को 100 बनाने के चक्कर में लगी हूँ तब ममता ने पूछा यह क्या है, तब बताया मेरा पहले ही दिन का महुआ 99 में बिका तभी दुकानदार ने कहा 1 रूपये का महुआ और ले आवों मैं तुम्हे 100 का नोट दूंगा उसी दिन से 99 को 100 बनाने के चक्कर में लगी हूँ, तभी ममता को भी समझ में आया पैसे बचाना चाहिए उस दिन से ममता भी 99 के चक्कर में लग गई |
