जुल्मों के बंधन टूटेंगे, मकड़ी के जाले छूटेंगे...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे है :
जुल्मों के बंधन टूटेंगे, मकड़ी के जाले छूटेंगे-
तू हाथों में ले ले किताब, सौ रस्ते इससे फूटेंगे-
आधा भारत नारी है, फिर भी क्या बेचारी है-
पढना और पढाना है, शिक्षित गाँव बनाना है-
जुल्मों के बंधन टूटेंगे, मकड़ी के जाले छूटेंगे...
