महाराष्ट्र के कुछ गाँव वनोपज की बिक्री खुद करेंगे, इससे ग्रामसभा और आदिवासी की आय बढ़ेगी...
ग्राम-मोहगाँव, तहसील-धनोरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से उत्तम अटाला गोंडी भाषा में बता रहे है कि आदिवासी जनजातियो में रोजगार का अधिक साधन नहीं है उनके इलाकों में पानी की कमी है इसलिए वे खेती भी अच्छे से नहीं कर पाते है इसलिए वे जंगल से महुआ टोडी जैसे उत्पाद जमा करना और उनको बेचने का काम करते है बांस, तेंदूपत्ता आदि भी जमा करते है उससे भी उनको पैसा मिलता है पर उनको अक्सर इसके लिए उचित दाम नहीं मिलता इसलिए इस बार महाराष्ट्र के कुछ गाँव में खुद ग्राम सभा बांस तेंदूपत्ता की कटाई करेंगी और खुद टेंडरिंग और बेचेगी, आशा है इस काम से ग्राम सभा को भी अधिक आय होगी और आदिवासियों की आमदनी भी बढ़ेगी। उत्तम अटाला@7719930515

