कान्हा किसली में सरवन ताल बने है, सरवन ताल घूमे ला आबे हो...ददरिया गीत
ग्राम-धीरी, पोस्ट-जैतपुरी, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से जगदीश कुमार मरकाम एक ददरिया गीत सुना रहे हैं:
कान्हा किसली नेशनल पार्क बने हे पार्क घुमेला हो-
विदेशियों के तो लेखा नहीं है, देशियों के तो पता नहीं है—
कान्हा किसली घुमेला आहो दोष-
मध्यप्रदेश के जिला-बालाघाट, बैहर,तहसील मा आवय दे गावय ले-
बैहर से 15 किलो मीटर की दूरी पर चेक ले जाथे रे गवाय ले-
कान्हा में हिरन बारासिंघा हावे, चिता शेर बाघ विचरण करथे-
कान्हा किसली में सरवन ताल बने है, सरवन ताल घुमे ला अबे हो-
जहा बंदर, सियार, भालु, आथे लक्कड बघा तेंदुआ पानी पियाथे-
टूरिस्टर मन हा आके पिकनिक मनाथे रे दोष-
ददरिया के गायक जगदीश कुमार मरकाम, रहैया आव पार्क घुमेला हो...
