जो पहना हथकड़ी उसे पड़ा छड़ी-छड़ी...कविता
विकासखण्ड-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक रचना सुना रहे है :
जो पहना हथकड़ी उसे पड़ा छड़ी-छड़ी-
देश के खातिर सूरवीरो में आफत पड़ी-
अंग्रेजो से लोहा लेने पड़ी उन्हें एक छड़ी-
जब देश आजादी पाई सब वीरो में ख़ुशी छाई-
बाबा साहेब ने सविधान रच डाली-
अब उसकी एक कड़ी टूट गई आज जमाना बदल गया-
संविधान विधान तब लुटरो की भेट चढ़ी-
धन्य भारत माता के सपूतो तेरी ये कुर्बानी की कड़ी-
तेरे ही हाथो तू फिर से संविधान रचा-
आज सब यह कहते अंतिम यह कड़ी सौ में-
निन्यानवे बेईमान फिर भी मेरा भारत महान...
